इस विषय में 113 शब्द — यूजीसी नेट इतिहास (कोड 06) की परीक्षा-दृष्टि से तैयार।
इस विषय के यूनिट-वार संपूर्ण अवलोकन नोट्स: यूनिट 4: मध्यकालीन भारतीय इतिहास के स्रोत · यूनिट 5: प्रशासन और अर्थव्यवस्था · यूनिट 6: समाज और संस्कृति
| शब्द | अर्थ | काल / संदर्भ |
|---|---|---|
| आइन-इ-दशसाला Ain-i-Dashsalah | राजा टोडरमल के अधीन विकसित अकबर की दस-वर्षीय (1570-1580) भू-राजस्व बंदोबस्त व्यवस्था, जो पिछले दशक की फसल कीमतों और उपज का औसत निकालकर एक स्थिर, पूर्वानुमेय नकद राजस्व दर तय करती थी। | Mughal Period (Akbar) |
| अल्तमग़ा जागीर Altamgha Jagir | जहाँगीर द्वारा प्रचलित एक अहस्तांतरणीय, वंशानुगत भूमि-प्रदत्ति, जो मुगल सम्राटों द्वारा प्रिय सामंतों अथवा पारिवारिक वंशजों को सीधे दी जाती थी। | Mughal Empire (Jahangir onwards) |
| अमरगण Amargana | विजयनगर शासन में सैन्य टुकड़ियों अथवा स्थानीय सुरक्षा-दुर्गों के भरण-पोषण हेतु आवंटित भूमि। | Vijayanagara Empire |
| आमिलगुज़ार Amilguzar | मुगल साम्राज्य में सरकार (ज़िला) स्तर का मुख्य राजस्व-संग्राहक, जो भू-राजस्व के निर्धारण और वसूली हेतु उत्तरदायी था। | Mughal Empire |
| अमुक्तमाल्यद Amuktamalyada | विजयनगर सम्राट कृष्णदेवराय द्वारा स्वयं रचित एक तेलुगु काव्य-ग्रंथ, जो केवल साहित्यिक कृति के रूप में ही नहीं बल्कि राजधर्म (शासन-नीति) पर विस्तृत विचारों के लिए भी उल्लेखनीय है — जिसमें शासन, सिंचाई, व्यापार व विदेश-संबंधों संबंधी सलाह शामिल है। | c. 1509–1529, reign of Krishnadevaraya |
| आरिज़-ए-मुमालिक Ariz-i-Mumalik | दिल्ली सल्तनत में सैन्य विभाग (दीवान-ए-अर्ज़) का मंत्री, जो सेना की भर्ती, शस्त्र-प्रबंधन और सैनिकों के वेतन का प्रबंध करता था। | Delhi Sultanate |
| अष्टदिग्गज Ashtadiggajas | सम्राट कृष्णदेवराय के दरबार को सुशोभित करने वाले आठ विशिष्ट तेलुगु कवियों और विद्वानों को दिया गया सामूहिक नाम। | Vijayanagara Empire |
| अष्टप्रधान Ashtapradhan | शिवाजी की आठ मंत्रियों की परिषद, जिसमें प्रत्येक मंत्री किसी एक विशेष प्रशासनिक क्षेत्र का ज़िम्मेदार होता था (जैसे सामान्य प्रशासन हेतु पेशवा, सैन्य मामलों हेतु सर-ए-नौबत) — यह प्रारंभिक मराठा राज्य की मूल प्रशासनिक संरचना थी। | Maratha Empire, reign of Shivaji |
| अष्टप्रधान व्यवस्था Asthadhan System | छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा मराठा राज्य-प्रशासन की देखरेख हेतु स्थापित आठ मंत्रियों की परिषद। | Maratha Administration |
| आयगार व्यवस्था Ayagar System | विजयनगर साम्राज्य में स्थानीय सार्वजनिक कार्यों का प्रबंध करने वाले बारह वंशानुगत ग्राम-अधिकारियों की प्रशासनिक व्यवस्था। | Vijayanagara Empire |
| बा-शरा Ba-shara | सूफी सिलसिले अथवा साधक, जो इस्लामी विधि-संहिता (शरीअत) का कठोरता से पालन करते थे। | Medieval Religious History |
| बैत-उल-माल Bait-ul-mal | इस्लामी राजनीतिक व्यवस्थाओं में, दिल्ली सल्तनत सहित, सार्वजनिक कोषागार — वह संस्था, जिसके माध्यम से राजकीय राजस्व एकत्रित और वितरित किया जाता था। | Delhi Sultanate & Islamicate polities |
| बलूता Baluta | वंशानुगत सेवा-भुगतान की परंपरागत मराठा ग्राम व्यवस्था, जिसके अंतर्गत बारह ग्राम शिल्पकार/सेवा जातियां (बलूतेदार — बढ़ई, लोहार, नाई आदि) समुदाय को अपनी सेवाओं के बदले फसल का निश्चित हिस्सा प्राप्त करती थीं। | Maratha Period |
| बरीद Barid | क्षेत्रीय मुख्यालयों में तैनात एक राजकीय गुप्तचर अथवा समाचार-लेखक, जो स्थानीय घटनाओं की सूचना सीधे केंद्रीय सत्ता को भेजता था। | Delhi Sultanate & Mughals |
| बटाई Batai | भू-राजस्व निर्धारण की एक पद्धति, जो कटी हुई फसल के राज्य और कृषक के बीच वास्तविक विभाजन (ग़ल्ला-बख्शी) पर आधारित थी। | Sultanate & Mughal Periods |
| तालीकोटा का युद्ध Battle of Talikota | 1565 का यह निर्णायक युद्ध, जिसमें दक्कन की सल्तनतों के संयुक्त गठबंधन ने विजयनगर साम्राज्य को पराजित किया, उसकी राजधानी हम्पी की लूट का कारण बना और विजयनगर के अपरिवर्तनीय पतन की शुरुआत का प्रतीक बना। | 1565 |
| पानीपत की लड़ाइयाँ Battles of Panipat | पानीपत में लड़ी गई तीन निर्णायक लड़ाइयाँ: पहली (1526, बाबर ने इब्राहीम लोदी को हराकर मुग़ल साम्राज्य की नींव रखी), दूसरी (1556, अकबर की सेनाओं ने हेमू को हराकर मुग़ल सत्ता सुरक्षित की), और तीसरी (1761, अहमद शाह अब्दाली ने मराठों को हराकर उनके उत्तर की ओर विस्तार को रोक दिया)। | 1526, 1556, 1761 |
| बे-शरा Be-shara | सूफी संन्यासी, फ़क़ीर अथवा सिलसिले, जो स्वयं को पारंपरिक इस्लामी विधि-संहिता (शरीअत) से नहीं बांधते थे। | Medieval Religious History |
| भक्ति आंदोलन Bhakti Movement | जाति-भेद व कर्मकांडों की जकड़न से परे जाकर, ईश्वर के प्रति सीधे, भावनात्मक समर्पण पर बल देने वाला यह धार्मिक आंदोलन दक्षिण भारत के अलवार व नयनार संतों से शुरू हुआ, और बाद में कबीर, रामानंद व चैतन्य जैसे संतों के माध्यम से उत्तर भारत में गहराई से फैला। | c. 7th century CE onward, spreading North by 15th–16th century |
| बितिकची Bitikchi | मुगल प्रशासन में सरकार स्तर पर आमिलगुज़ार के साथ कार्यरत मुख्य लेखा-रक्षक और हिसाब-किताब रखने वाला अधिकारी। | Mughal Empire |
| चौधरी Chaudhary | एक वंशानुगत ग्रामीण अधिकारी, जो परगने के गाँवों के एक समूह से राजस्व वसूली हेतु उत्तरदायी था। | Sultanate & Mughal Periods |
| चौथ Chauth | निर्धारित भू-राजस्व के एक-चौथाई (चौथ) के बराबर कर, जो मराठों द्वारा अपने प्रत्यक्ष प्रशासन से बाहर के क्षेत्रों पर एक प्रकार के संरक्षण-शुल्क के रूप में वसूला जाता था। | Maratha Confederacy |
| चिश्ती सिलसिला Chishti Silsila | मध्यकालीन भारत का सबसे प्रभावशाली सूफ़ी सिलसिला, जिसकी नींव ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती ने रखी और जिसे निज़ामुद्दीन औलिया जैसे संतों ने आगे बढ़ाया — इसकी पहचान समा (भक्ति-संगीत) पर विशेष ज़ोर और राजसत्ता से अपेक्षाकृत दूरी बनाए रखना है। | 12th century CE onward |
| दहसाला व्यवस्था Dahsala System | अकबर द्वारा सन् 1580 में स्थापित एक मानकीकृत भू-राजस्व निर्धारण प्रणाली, जिसमें दस वर्षों की औसत उपज और मूल्यों के आधार पर कर-दर निर्धारित की जाती थी। | Mughal Empire (Akbar) |
| दास Dasa | प्राचीन और मध्यकालीन भारतीय समाज में सेवक या बंधुआ/अस्वतंत्र श्रमिक हेतु प्रयुक्त शब्द (वैदिक दास-दस्यु विरोध से लेकर मध्यकालीन कृषि बंधुआगिरी तक) — किसान वर्ग से नीचे की सामाजिक स्तरीकरण को समझने हेतु महत्वपूर्ण श्रेणी। | Vedic Period to Medieval Period |
| दासकूट Dasakuta | कर्नाटक में भक्ति आंदोलन की एक शाखा, जिसमें गृहस्थ भक्त कन्नड़ भजनों के माध्यम से माधवाचार्य के द्वैत दर्शन का प्रचार करते थे। | Medieval South India / Bhakti |
| दस्तूर Dastur | अकबर की ज़ब्ती/दहसाला राजस्व व्यवस्था के अंतर्गत किसी परगने की फसल-वार मानक राजस्व दरों की अनुसूची — स्थानीय बेंचमार्क, जिसके विरुद्ध वास्तविक निर्धारण (जमा) की गणना की जाती थी। | Mughal Period (Akbar) |
| देशमुख Deshmukh | मराठा क्षेत्र का वंशानुगत स्थानीय राजस्व/प्रशासनिक अधिकारी, जो गांवों के समूह पर राजस्व संग्रह और स्थानीय व्यवस्था हेतु उत्तरदायी था, प्रायः वतन धृति के अंतर्गत भूमि धारण करता था — उत्तर भारतीय जमींदार का दक्कनी समकक्ष। | Deccan Sultanates & Maratha Period |
| दीन-ए-इलाही Din-i-Ilahi | अकबर द्वारा चलाया गया एक समन्वयवादी नैतिक-आध्यात्मिक पंथ ('ईश्वरीय धर्म'), जिसमें इस्लाम, हिंदू, पारसी व ईसाई धर्मों के तत्व मिश्रित थे — इसके वास्तविक अनुयायी बहुत कम रहे, और अधिकांश इतिहासकार इसे एक जन-धर्म बनाने के गंभीर प्रयास के बजाय अकबर के सुलह-ए-कुल (सर्व-सहिष्णुता) के व्यापक दर्शन की अभिव्यक्ति मानते हैं। | Established 1582, reign of Akbar |
| दीवान-ए-अर्ज़ Diwan-i-Arz | दिल्ली सल्तनत में सैन्य मामलों का केंद्रीय विभाग, जिसकी स्थापना ग़ियासुद्दीन बलबन ने की थी। | Delhi Sultanate |
| दीवान-ए-बंदगान Diwan-i-Bandagan | सुल्तान फ़िरोज़ शाह तुग़लक़ द्वारा स्थापित राजकीय दासों के लिए समर्पित प्रशासनिक विभाग। | Delhi Sultanate (Tughlaq) |
| दीवान-ए-इंशा Diwan-i-Insha | दिल्ली सल्तनत में राजकीय पत्राचार, राजकीय अभिलेखागार और कूटनीतिक संचार का मंत्रालय। | Delhi Sultanate |
| दीवान-ए-ख़ैरात Diwan-i-Khairat | फ़िरोज़ शाह तुग़लक़ द्वारा स्थापित दानशील अनुदान विभाग, जो अनाथ बच्चों, विधवाओं की सहायता और विवाह हेतु धन उपलब्ध कराता था। | Delhi Sultanate (Tughlaq) |
| दीवान-ए-कोही Diwan-i-Kohi | मुहम्मद बिन तुग़लक़ द्वारा भूमि की कृषि-उन्नति हेतु स्थापित विशेष कृषि-कल्याण एवं विकास विभाग। | Delhi Sultanate (Tughlaq) |
| दीवान-ए-मुस्तख़राज Diwan-i-Mustakhraj | अलाउद्दीन ख़िलजी द्वारा स्थापित बकाया राजस्व की वसूली और समायोजन का प्रशासनिक विभाग। | Delhi Sultanate (Khalji) |
| दीवान-ए-रिसालत Diwan-i-Rasalat | दिल्ली सल्तनत में विदेश मामलों, कूटनीतिक दूतों और धार्मिक अनुदानों की देखरेख करने वाला शाही मंत्रालय। | Delhi Sultanate |
| दो-अस्पा सिह-अस्पा Du-aspa Sih-aspa | जहाँगीर द्वारा सवार-पद में जोड़ी गई एक विशेष उप-श्रेणी, जिसके अंतर्गत मनसबदार को अपने सवार-पद से दोगुने घोड़े रखने होते थे। | Mughal Empire (Jahangir) |
| फ़ना Fana | सूफी दर्शन की एक अवधारणा, जो गहन भक्ति के माध्यम से मानवीय अहं के दिव्य सत्ता में विलीन हो जाने को दर्शाती है। | Sufism |
| फ़ौजदार Faujdar | ज़िला (सरकार) स्तर का कार्यकारी अधिकारी और सैन्य-चौकी प्रमुख, जो पुलिसिंग, विधि-व्यवस्था तथा राजस्व वसूली में सहायता हेतु उत्तरदायी था। | Mughal Empire |
| फरमान Firman | किसी मुगल सम्राट द्वारा जारी राजकीय आदेश या फरमान, जिसमें कानून का बल था — मुगल शाही आदेश का प्राथमिक साधन, प्रशासनिक नियुक्तियों, भूमि अनुदानों और यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों को दिए गए व्यापार विशेषाधिकारों हेतु व्यापक रूप से प्रयुक्त। | Mughal Period |
| फ़ुतूह Futuh | सूफी हॉस्पिस (खानक़ाह) को भक्तों द्वारा स्वेच्छा से दिए जाने वाले अयाचित उपहार, दान अथवा भेंट। | Sufism |
| ग़ल्ला-बख्शी Ghalla-Bakshi | एक परंपरागत फ़सल-विभाजन पद्धति, जिसमें कटा हुआ अनाज सीधे कृषक और राजकीय अभिकर्ता के बीच बाँट दिया जाता था। | Sultanate & Mughal Periods |
| इक़्ता Iqta | दिल्ली सल्तनत में किसी सरदार अथवा अधिकारी (मुक़्ती/इक़्तादार) को दिया गया क्षेत्रीय प्रदत्ति, जो नकद वेतन के बदले उसे उस क्षेत्र का राजस्व वसूलने का अधिकार सैन्य अथवा प्रशासनिक सेवा के प्रतिफल में देता था — सल्तनत प्रशासन की एक मूल संस्था। | Delhi Sultanate |
| इक़्तादार Iqtadar | इक़्ता-प्रदत्ति का धारक, जो क्षेत्रीय राजस्व वसूलने, व्यवस्था बनाए रखने और सुल्तान को सैनिक उपलब्ध कराने हेतु उत्तरदायी था। | Delhi Sultanate |
| जागीर Jagir | मुगल राज्य द्वारा किसी मनसबदार को नकद वेतन के बदले प्रदत्त किसी निर्दिष्ट क्षेत्र से भू-राजस्व वसूलने के अधिकार का आबंटन — प्रत्यक्ष भूमि स्वामित्व से भिन्न, और मुगल जागीरदारी व्यवस्था का आधार। | Mughal Period |
| जागीरदारी Jagirdari | मुगल व्यवस्था, जिसके अंतर्गत राजकीय अधिकारियों (मनसबदारों) को नकद वेतन के बदले निर्दिष्ट भूमि-क्षेत्रों (जागीरों) पर राजस्व-अधिकार दिए जाते थे। | Mughal Empire |
| जंगम Jangama | कर्नाटक की शैव भक्ति परंपरा का एक घुमंतू/परिव्राजक लिंगायत (वीरशैव) पुजारी या तपस्वी, जो बसव द्वारा स्थापित लिंगायत सामुदाय हेतु आध्यात्मिक मार्गदर्शक और मध्यस्थ के रूप में कार्य करता था। | c. 12th Century CE Onward, South India |
| जज़िया Jaziya | इस्लामी विधि के अंतर्गत गैर-मुस्लिम प्रजा (जिम्मी) पर सैन्य सेवा के बदले लगाया जाने वाला प्रति-व्यक्ति कर, दिल्ली सल्तनत और मुगल शासकों द्वारा रुक-रुक कर लगाया गया — अकबर द्वारा सुलह-इ-कुल के अंतर्गत समाप्त, बाद में औरंगजेब द्वारा 1679 में पुनः लगाया गया। | Delhi Sultanate & Mughal Period |
| जज़िया Jizya | एक इस्लामी राज्य में सुरक्षा एवं संरक्षण के बदले संरक्षित गैर-मुस्लिम प्रजा (ज़िम्मी) पर लगाया जाने वाला प्रति-व्यक्ति कर। | Sultanate & Mughal Periods |
| कनकूत Kankut | भू-राजस्व निर्धारण की एक पद्धति, जो प्रति इकाई क्षेत्र की खड़ी फसल के दृश्य निरीक्षण और अनुमानित उपज (कूत) पर आधारित थी। | Sultanate & Mughal Periods |
| कारख़ाना व्यवस्था Karkhana System | दिल्ली सल्तनत व मुग़ल साम्राज्य के अधीन राजकीय कारख़ाने, जो शाही परिवार व प्रशासन हेतु वस्त्र, हथियार व विलासिता की वस्तुएँ बनाते थे — यह विनिर्माण में राज्य की सीधी भागीदारी को दर्शाता है। | Delhi Sultanate & Mughal Empire |
| खानक़ाह Khanqah | एक सूफी हॉस्पिस अथवा मठ, जो सूफी गुरु (पीर) और उनके शिष्यों के लिए आवासीय, आध्यात्मिक तथा सामुदायिक शिक्षण केंद्र का कार्य करता था। | Medieval Religious History |
| ख़राज Kharaj | गैर-मुस्लिम कृषि भूमि पर लगाया जाने वाला भू-राजस्व कर, जो सामान्यतः कृषि उपज के एक-तिहाई से आधे भाग तक निर्धारित था। | Sultanate & Mughal Periods |
| खिलाफत Khilafat | ऐतिहासिक पैन-इस्लामिक धार्मिक-राजनीतिक नेतृत्व की संस्था; भारतीय इतिहास में सर्वाधिक महत्वपूर्ण "खिलाफत आंदोलन" (1919-1924) के रूप में, जब भारतीय मुसलमानों ने तुर्क खलीफा के अधिकार की रक्षा हेतु आंदोलन किया, गांधी के असहयोग आंदोलन से जुड़कर। | Medieval Islamic World; Khilafat Movement 1919–1924 |
| ख़ुदकाश्त Khud-kasht | अपने मूल गाँव में भूमि तथा कृषि-उपकरणों के स्वामी निवासी-कृषक, जो राज्य को सीधे कर चुकाते थे। | Mughal Empire |
| ख़ुम्स Khums | सैन्य अभियानों में प्राप्त युद्ध-लूट (ग़नीमा) में से राज्य का हिस्सा, जो परंपरागत रूप से एक-पंचमांश अर्थात बीस प्रतिशत निर्धारित था। | Delhi Sultanate |
| खुत Khut | दिल्ली सल्तनत में एक ग्राम-मुखिया अथवा भू-अधिकृत सत्ता, जो केंद्रीय राज्य की ओर से भू-राजस्व वसूल करता था। | Delhi Sultanate |
| कोतवाल Kotwal | मध्यकालीन नगरों में सार्वजनिक व्यवस्था, रात्रि-प्रहरा और बाज़ार-निरीक्षण हेतु उत्तरदायी मुख्य पुलिस अधिकारी और नगर-मजिस्ट्रेट। | Sultanate & Mughal Periods |
| कुर्निश Kurnish | मुगलकालीन दरबारी अभिवादन की एक मुद्रा — दाहिने हाथ की पीठ को माथे पर रखकर झुकना — जो सम्मान प्रकट करने हेतु प्रयुक्त होती थी, और अधिक विस्तृत 'तस्लीम' मुद्रा से एक श्रेणी नीचे मानी जाती थी। | Mughal Empire |
| मदद-ए-माश Madad-i-Ma'ash | मुगल सम्राटों द्वारा धार्मिक विद्वानों, संतों, विधवाओं और धर्मार्थ संस्थाओं को दी जाने वाली राजस्व-मुक्त भूमि-प्रदत्तियाँ। | Mughal Empire |
| मदरसा Madarasa | धर्मशास्त्र, कानून और प्रायः धर्मनिरपेक्ष विषय (गणित, तर्कशास्त्र, चिकित्सा) पढ़ाने वाली इस्लामी उच्च शिक्षा संस्था — सल्तनत और मुगल शासकों तथा अमीरों ने मदरसों को औपचारिक शिक्षा के केंद्रों के रूप में संरक्षण दिया, प्रारंभिक मकतब के साथ-साथ। | Delhi Sultanate & Mughal Period |
| महानायकाचार्य Mahanayakangacharya | विजयनगर शासकों द्वारा नियुक्त एक शाही प्रशासनिक अधिकारी, जो क्षेत्रीय नायकों के कार्यों का समन्वय और निरीक्षण करता था। | Vijayanagara Empire |
| मंसब Mansab | मनसबदारी व्यवस्था के अंतर्गत किसी मुगल अधिकारी या अमीर (मनसबदार) का संख्यात्मक पद/श्रेणी, जो जात (व्यक्तिगत स्थिति/वेतन) और सवार (रखी जाने वाली घुड़सवार सेना) के रूप में व्यक्त होता था — संपूर्ण मुगल कुलीन वर्ग और सेना का संगठनात्मक सिद्धांत। | Mughal Period |
| मनसबदारी Mansabdari | मुगल प्रशासनिक और सैन्य पदानुक्रम व्यवस्था, जिसमें प्रत्येक सामंत (मनसबदार) एक संख्यात्मक रैंक (मनसब) धारण करता था, जो उसकी प्रतिष्ठा, वेतन और सैन्य दायित्व निर्धारित करती थी — मुगल नौकरशाही एवं सैन्य संगठन की रीढ़। | Mughal Empire |
| मनसबदारी व्यवस्था Mansabdari System | अकबर द्वारा प्रवर्तित एक सैन्य-सह-नौकरशाही पदानुक्रम, जिसमें अधिकारियों को दोहरी संख्यात्मक श्रेणियों (ज़ात और सवार) के माध्यम से रैंक दी जाती थी। | Mughal Empire (Akbar) |
| मकतब Maqtab | प्रायः मस्जिद से संलग्न प्रारंभिक इस्लामी विद्यालय, जो छोटे बच्चों को बुनियादी साक्षरता, कुरान और अंकगणित पढ़ाता था — मध्यकालीन इस्लामी शिक्षा व्यवस्था में अधिक उन्नत मदरसे का प्राथमिक-स्तरीय समकक्ष। | Delhi Sultanate & Mughal Period |
| मुन्हियान Munhiyans | अलाउद्दीन ख़िलजी द्वारा नियुक्त गुप्तचर, जो अनाज-मंडियों में मूल्यों की निगरानी और जमाख़ोरी रोकने का कार्य करते थे। | Delhi Sultanate (Khalji) |
| मुक़द्दम Muqaddam | प्राथमिक ग्रामीण स्तर पर स्थानीय भूमि-प्रशासन और कर वसूली हेतु उत्तरदायी मुख्य ग्राम-कार्यकारी अथवा मुखिया। | Sultanate & Mughal Periods |
| मुक़्ती Muqti | दिल्ली सल्तनत में इक़्ता क्षेत्र पर शासन और राजस्व वसूली का अधिकार प्राप्त राजकीय अधिकारी। | Delhi Sultanate |
| नस्क़ Nasaq | मुगल काल में ताज़ा वार्षिक क्षेत्र-मापन के बजाय अनुमान अथवा ऐतिहासिक राजस्व-अभिलेखों पर आधारित एक त्वरित भू-राजस्व निर्धारण प्रक्रिया। | Mughal Empire |
| नायनकर व्यवस्था Nayankara System | विजयनगर साम्राज्य की सैन्य-सामंती संरचना, जिसमें सैन्य सेवा के बदले सेनापतियों (नायकों) को क्षेत्रीय इकाइयाँ प्रदान की जाती थीं। | Vijayanagara Empire |
| निर्गुण Nirguna | भक्ति आंदोलन की एक धारा, जो परम सत्ता को निराकार, निर्गुण तथा अशरीरी रूप में पूजती है, जैसे कबीर और नानक की परंपरा में। | Medieval Religious History |
| पाहीकाश्त Pahi-kasht | अस्थायी अथवा प्रवासी कृषक, जो संविदा-आधारित काश्तकारी पर अपने मूल गाँव के अतिरिक्त किसी अन्य गाँव में भूमि जोतते थे। | Mughal Empire |
| पाइबाक़ी Paibaqi | मुगल अधिकारियों को जागीर के रूप में बाँटने हेतु आरक्षित अथवा अनाबंटित राजस्व भूमि। | Mughal Empire |
| परगना Pargana | मुगलकालीन सरकार (जिला) का प्रशासनिक उप-विभाग, जो स्वयं कई गांवों से मिलकर बनता था, शिकदार, आमिल और कानूनगो जैसे राजस्व अधिकारियों के अधीन। | Mughal Period |
| पोलिगार Poligar | विजयनगर एवं परवर्ती राज्यों के अधीन दक्षिण भारत में सुदृढ़ सम्पदाओं (पालयम) के स्वामी क्षेत्रीय सैन्य सरदार अथवा पालैयक्करर। | Vijayanagara & Post-Vijayanagara |
| पोलिगर Polygars | तेलुगु/तमिल "पालैयक्कारर" का अंग्रेजीकृत रूप — विजयनगर-उत्तरवर्ती नायक राज्यों के स्थानीय सरदार/सैन्य शासक, जो अमरम-प्रकार की भूधृति रखते थे और बाद में प्रारंभिक ब्रिटिश विस्तार का कर्नाटक में प्रतिरोध किया (पोलिगर युद्ध)। | Vijayanagara Successor States; Polygar Wars 1799–1805 |
| पोतदार Potdar | स्थानीय परगना स्तर का कोषाध्यक्ष अथवा रोकड़िया, जो सिक्कों की शुद्धता जाँचने और कृषि-निधियों के प्रबंधन हेतु उत्तरदायी था। | Mughal Empire |
| पुष्टिमार्ग Pushtimarga | वल्लभाचार्य द्वारा स्थापित एक वैष्णव भक्ति-संप्रदाय, जो कृष्ण के प्रति निःस्वार्थ भक्ति — अनुग्रह के मार्ग — पर केंद्रित था। | Bhakti Movement |
| क़ाज़ी Qazi | इस्लामी विधि-शास्त्र (शरीअत) के अनुसार असैनिक एवं आपराधिक न्याय का प्रशासन करने वाला इस्लामी न्यायाधीश। | Sultanate & Mughal Periods |
| राजपूत संघ Rajput Confederacy | राजस्थान के राजपूत कुलों के बीच बना गठबंधन, जो कभी आपसी रक्षा हेतु और कभी मुग़लों के अधीन या उनसे संधि करके (जैसे अकबर के राजपूत वैवाहिक व प्रशासनिक संबंधों में) बना — इसने मध्यकालीन उत्तर भारतीय राजनीति को गहराई से आकार दिया। | Medieval period, especially 16th–17th century |
| राय-रेखो Raya-Rekho | मराठा भू-राजस्व निर्धारण अभिलेख/विवरण (पेशवा प्रशासन से जुड़े व्यापक मराठा राजस्व-बंदोबस्त प्रलेखन का हिस्सा), जो किसी गांव या भूधारण की निर्धारित राजस्व देयता दर्ज करता था। | Maratha Period (Peshwa Administration) |
| सद्र-उस-सुदूर Sadr-us-Sudur | दिल्ली सल्तनत तथा मुगल साम्राज्य में धार्मिक अनुदानों, दान तथा न्यायिक संरक्षण का मुख्य धार्मिक अधिकारी एवं मंत्री। | Sultanate & Mughal Periods |
| सगुण Saguna | भक्ति आंदोलन की एक धारा, जो ईश्वर को मानवाकार रूपों, वैयक्तिक गुणों तथा दिव्य अवतारों के माध्यम से पूजती है, जैसे तुलसीदास और सूरदास की परंपरा में। | Medieval Religious History |
| समा Sama | एक सूफी संगीत-सभा अथवा आध्यात्मिक संगीत-आयोजन, जो श्रोताओं में उन्मादपूर्ण भक्ति-भाव तथा आध्यात्मिक तल्लीनता जागृत करने हेतु आयोजित होता था। | Sufism |
| सराय Sarai | मध्यकालीन व्यापार और तीर्थ मार्गों पर बना सड़क-किनारे का सराय/विश्रामगृह, जो यात्रियों, व्यापारियों और उनके माल को रात्रि आश्रय देता था — शेरशाह सूरी और मुगलों द्वारा सड़क और व्यापार-अवसंरचना निवेश के भाग रूप में व्यापक रूप से निर्मित। | Sultanate & Mughal Period |
| सरदेशमुखी Sardeshmukhi | राजस्व का लगभग एक-दसवाँ भाग, जिसका दावा मराठों ने चौथ के अतिरिक्त किया — मूलतः यह सरदेशमुख, एक वंशानुगत राजस्व-वसूली पद, के अधिकार के रूप में वसूला जाता था। | Maratha Confederacy |
| शहना-ए-मंडी Shahna-i-Mandi | अलाउद्दीन ख़िलजी द्वारा अनाज-मंडियों में मूल्य-निर्धारण, नियमन और आचरण की निगरानी हेतु नियुक्त निरीक्षक। | Delhi Sultanate (Khalji) |
| शरियत Shariyat | कुरान, हदीस और न्यायशास्त्रीय व्याख्या से व्युत्पन्न इस्लामी धार्मिक कानून, जो व्यक्तिगत, नागरिक और सैद्धांतिक रूप से आपराधिक मामलों को नियंत्रित करता था — सल्तनत और मुगल शासकों द्वारा आदर्श कानूनी-नैतिक मानक के रूप में अपनाया गया। | Delhi Sultanate & Mughal Period |
| सिलसिला Silsila | एक सूफी संप्रदाय अथवा आध्यात्मिक परंपरा, जो गुरु-शिष्य परंपरा की निरंतर शृंखला के माध्यम से स्वयं को पैग़म्बर मुहम्मद से जोड़ती है। | Sufism |
| सोंधर Sondhar | सूखे, फसल-नाश अथवा भूमि-पुनरुद्धार परियोजनाओं के दौरान राज्य द्वारा ग्रामीण कृषकों को दिए जाने वाले कृषि-ऋण। | Delhi Sultanate (Tughlaq) |
| सूफ़ीवाद Sufism | इस्लाम की रहस्यवादी धारा, जिसमें बाहरी अनुष्ठानों से अधिक आध्यात्मिक साधना व भक्ति के ज़रिए ईश्वर का प्रत्यक्ष, व्यक्तिगत अनुभव पाने पर बल दिया जाता है; भारत में यह चिश्ती व सुहरावर्दी जैसे विभिन्न सिलसिलों (आध्यात्मिक परंपराओं) में संगठित हुआ। | Spread widely in India from the 12th–13th century |
| सुहरावर्दी सिलसिला Suhrawardi Silsila | मध्यकालीन भारत का एक प्रमुख सूफ़ी सिलसिला, जो चिश्ती परंपरा से इस बात में भिन्न था कि इसने राजकीय संरक्षण स्वीकार करने और सत्ताधारियों से नज़दीकी संबंध बनाए रखने में कहीं अधिक सहजता दिखाई। | 12th–13th century CE onward |
| सुलह-इ-कुल Sulah-i-kul | अकबर की "सार्वभौमिक शांति/सहिष्णुता" की नीति — सभी धर्मों के बीच धार्मिक तटस्थता और सामंजस्य की राजकीय विचारधारा, जो जज़िया कर की समाप्ति और दीन-इ-इलाही युग की व्यापक शासन-दर्शन का आधार बनी। | Mughal Period (Akbar) |
| सुयूरग़ाल Suyurghal | मुगल शासकों द्वारा विद्वानों, धार्मिक नेताओं तथा धर्मार्थ संस्थाओं को दी जाने वाली वंशानुगत, कर-मुक्त भूमि-प्रदत्तियाँ। | Mughal Empire |
| तनख़ा जागीर Tankha Jagir | मुगल मनसबदारों को नकद वेतन के बदले दी जाने वाली भूमि-राजस्व प्रदत्तियाँ, जो कुछ वर्षों के अंतराल पर स्थानांतरित होती रहती थीं। | Mughal Empire |
| तक़ावी Taqavi | मुगल एवं सल्तनत प्रशासन द्वारा कृषकों को बीज, बैल तथा कुओं में सहायता हेतु वितरित आपातकालीन कृषि-विकास ऋण। | Sultanate & Mughal Periods |
| तकावी Taquavi | राज्य द्वारा किसानों को बीज, पशुधन या उपकरण खरीदने अथवा अकाल/फसल विफलता से उबरने हेतु दिए गए कृषि ऋण, प्रायः ब्याज-मुक्त — मध्यकालीन और बाद में औपनिवेशिक भू-राजस्व प्रशासन दोनों की बार-बार आने वाली विशेषता। | Medieval to Colonial Period |
| तरफ़दार Tarafdar | बहमनी सल्तनत में एक क्षेत्रीय प्रांत (तरफ़) की देखरेख करने वाला प्रांतीय गवर्नर अथवा सैन्य प्रधान। | Bahmani Sultanate |
| टोडरमल का बंदोबस्त Todar Mal's Bandobast | अकबर के अधीन राजा टोडरमल द्वारा किया गया व्यापक भू-राजस्व बंदोबस्त, जिसमें भूमि-वर्गीकरण (ज़ब्त) को दहसाला (दस-वर्षीय औसत) व्यवस्था के साथ जोड़कर मनमाने वार्षिक माँगों के बजाय स्थिर, पूर्वानुमेय नक़द राजस्व-दरें तय की गईं। | c. 1580s, reign of Akbar |
| तुर्कान-ए-चहलगानी Turkan-i-Chahalgani | 'चालीस' का समूह — इल्तुतमिश और उनके प्रारंभिक उत्तराधिकारियों के अधीन दिल्ली सल्तनत के शक्तिशाली तुर्क दास-सामंतों की मंडली, जो तेरहवीं शताब्दी की प्रारंभिक दरबारी राजनीति के केंद्र में थी। | Delhi Sultanate (Early 13th century) |
| तुर्कान-इ-चहलगानी Turkan-i-Chahlghani | "चालीस का गुट/समूह" — इल्तुतमिश के चालीस शक्तिशाली तुर्क दास-अमीरों का कुलीन आंतरिक गुट, जिन्होंने इल्तुतमिश की मृत्यु के बाद दिल्ली सल्तनत की राजनीति और सत्ता-निर्माण पर वर्चस्व बनाए रखा, बलबन द्वारा भंग किए जाने तक। | Delhi Sultanate (Slave Dynasty) |
| उलेमा Ulema | इस्लामी धार्मिक विद्वानों, न्यायशास्त्रियों और धर्मशास्त्रियों का शिक्षित वर्ग (आलिम का बहुवचन), जिन्होंने शरियत और इस्लामी सिद्धांत की व्याख्या की, प्रायः काज़ी (न्यायाधीश) के रूप में या सल्तनत व मुगल शासकों के सलाहकार के रूप में सेवा करते थे। | Delhi Sultanate & Mughal Period |
| वचन Vachanas | वीरशैव संतों — जैसे बसवन्ना, अल्लमा प्रभु — द्वारा रचित लयबद्ध, भक्तिपूर्ण कन्नड़ गद्य-काव्य, जो जाति-भेद और कर्मकांड की आलोचना करते थे। | Medieval South India / Lingayat |
| वारकरी Warkari | महाराष्ट्र में भगवान विठोबा के सम्मान में पंढरपुर तीर्थयात्रा पर केंद्रित एक अ-कर्मकांडी, समतावादी भक्ति आंदोलन। | Medieval Maharashtra / Bhakti |
| वतन Watan | मुगल-मराठा प्रशासनिक प्रयोग में अपनी वंशानुगत मातृभूमि या मूल क्षेत्रीय अधिकार की अवधारणा — "वतन जागीर" के आधार के रूप में सर्वाधिक महत्वपूर्ण, जो स्थानीय देशमुखों और देशपांडों द्वारा धारित वंशानुगत भूमि अधिकार था। | Mughal & Maratha Period |
| वतन जागीर Watan Jagir | क्षेत्रीय सरदारों — जैसे राजपूत शासकों — द्वारा अपनी पैतृक सम्पदाओं में धारित अहस्तांतरणीय, वंशानुगत भूमि-राजस्व प्रदत्तियाँ। | Mughal Empire |
| विलायत Wilayat | वह आध्यात्मिक क्षेत्राधिकार, प्रदेश अथवा डोमेन, जिस पर एक सूफी गुरु (शेख़) आध्यात्मिक सत्ता रखता था। | Sufism |
| ज़ब्त व्यवस्था Zabt System | भूमि-निर्धारण की वह पद्धति, जिसमें भूमि का भौतिक मापन (जरीब) कर फ़सल-उपज के आधार पर निश्चित नकद राजस्व-दर लागू की जाती थी। | Mughal Empire (Akbar) |
| ज़कात Zakat | मुस्लिम नागरिकों की संचित संपत्ति और परिसंपत्तियों पर वार्षिक रूप से लगाया जाने वाला एक अनिवार्य धार्मिक कर (साढ़े दो प्रतिशत), जो धर्मार्थ उद्देश्यों हेतु प्रयुक्त होता था। | Sultanate & Mughal Periods |
| ज़मींदार Zamindar | मुग़ल संप्रभुता के अधीन कृषि भूमि से राजस्व वसूलने का वंशानुगत अधिकार रखने वाले भूमि-अभिजनों हेतु प्रयुक्त एक व्यापक शब्द। | Mughal Empire |
| ज़वाबित Zawabit | सुल्तानों अथवा मुगल सम्राटों द्वारा इस्लामी विधि (शरीअत) की पूरक व्यवस्था हेतु जारी असैनिक राजकीय विनियम, शाही फ़रमान अथवा प्रशासनिक कानून। | Delhi Sultanate & Mughals |
| ज़ियारत Ziyarat | आध्यात्मिक आशीर्वाद (बरकत) एवं मध्यस्थता प्राप्त करने हेतु सूफी संतों की मज़ारों (दरगाहों) पर तीर्थाटन की परंपरा। | Sufism |
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Itihaaskar — UGC NET/JRF & UPSC History Optional notes by Parveen Malik (B.Tech. (CSE), M.A. (History), History JRF). Also spelt Itihaskar.