प्राचीन भारतीय इतिहास — शब्दावली

इस विषय में 78 शब्द — यूजीसी नेट इतिहास (कोड 06) की परीक्षा-दृष्टि से तैयार।

शब्दअर्थकाल / संदर्भ
अग्रहार
Agrahara
करमुक्त भूमि अनुदान, जो मुख्यतः ब्राह्मणों को धार्मिक और विद्वत्तापूर्ण कार्यों के लिए दिया जाता था; इसकी राजस्व वसूली का अधिकार दानग्रहीता को प्राप्त हो जाता था।Gupta & Early Medieval Periods
अक्षपटलाधिकृत
Akshapataladhikrita
अभिलेखों, भूमि-दस्तावेज़ों और राजकीय अनुज्ञप्तियों के प्रबंधन हेतु उत्तरदायी उच्च मंत्री या अधीक्षक।Gupta & Post-Gupta Administration
अमरम्
Amaram
विजयनगर साम्राज्य में सैन्य सेनापतियों (नायकों) को प्रदत्त भू-क्षेत्र, जिसके बदले वे सैन्य टुकड़ी बनाए रखते और वार्षिक कर चुकाते थे।Vijayanagara / Late Early Medieval South
अमात्य
Amatya
प्राचीन भारतीय राज्यों में उच्च पदस्थ नागरिक अधिकारियों, मंत्रियों अथवा कार्यकारी अधिकारियों के लिए प्रयुक्त सामान्य पदनाम।Mauryan & Post-Mauryan Periods
अरुवंतै
Aruvantai
प्रारंभिक तमिल समाज में स्थानीय भूस्वामी वर्ग अथवा स्थानीय सरदारों को दर्शाने वाली सामाजिक-कृषि श्रेणी।Sangam Age / Early South India
आयक स्तम्भ
Ayaka Pillars
बौद्ध स्तूपों की चारों दिशाओं में स्थापित पाँच नक्काशीदार पाषाण स्तम्भ, जो बुद्ध के जीवन की पाँच प्रमुख घटनाओं के प्रतीक हैं।Ikshvaku & Satavahana / Andhra
बलि
Bali
प्रारंभिक वैदिक काल में जनजातीय सरदारों को स्वेच्छा से दी जाने वाली भेंट, जो उत्तर वैदिक काल तक आते-आते राजा द्वारा अनिवार्य रूप से वसूला जाने वाला कर बन गई।Vedic Period
भाग
Bhaga
कृषि उपज पर लगने वाला राजकीय कर अथवा भू-राजस्व का अंश, जो परंपरागत रूप से कुल उपज के छठे भाग के बराबर निर्धारित था।Vedic to Gupta Periods
भांडागाराधिकृत
Bhandagaradhikrita
राजकीय भंडारगृहों, सार्वजनिक अन्न कोठारों और कोषागार के संचय की देखरेख करने वाला उच्च अधिकारी अथवा कोषाध्यक्ष।Gupta & Post-Gupta Administration
भूमिच्छिद्रन्यायविधान
Bhumi-chidra-vidhana-nyaya
प्राचीन भारतीय भूमि-अनुदान अभिलेखों में मिलने वाला एक विधिक सिद्धांत, जिसके अंतर्गत कुछ अकृषित अथवा 'बंजर' भूमि को राजा की दान देने की सामान्य शक्ति की सीमाओं से मुक्त माना जाता था।Early Medieval Land-Grant Inscriptions
ब्रह्मदेय
Brahmadeya
ब्राह्मणों को उपहार स्वरूप दी गई भूमि अथवा संपूर्ण गाँव, जो करमुक्त होते थे और जिनका उद्देश्य कृषि विस्तार के साथ-साथ वैचारिक प्रभुत्व स्थापित करना भी था।Vedic to Early Medieval Periods
बुर्ज़होम
Burzahom
कश्मीर का एक महत्वपूर्ण नवपाषाण-महापाषाण स्थल, जो गर्त-आवासों, मोटे धूसर मृद्भांडों, पाषाण कुल्हाड़ियों और मानव के साथ पशु-समाधि की परंपरा के लिए जाना जाता है।Neolithic Period (~3000–1000 BCE)
चर्ट
Chert
एक सूक्ष्म-कणिकीय अवसादी शैल, जिसका हड़प्पा सभ्यता में मानकीकृत बाटों, फलकों और मुहरों के निर्माण में व्यापक उपयोग होता था।Indus Valley Civilization
देवदान
Devadana
मंदिरों को धार्मिक रख-रखाव, देखभाल और अनुष्ठान-अर्थव्यवस्था हेतु दी जाने वाली करमुक्त भूमि।Early Medieval & South India
देवदासी
Devadasi
किसी देवता को समर्पित महिला मंदिर-सेविका, जो अनुष्ठानिक नृत्य (भरतनाट्यम के प्रारंभिक रूप सहित) करती थी और मंदिर की परंपराओं का निर्वहन करती थी।Post-Gupta to Early Medieval
धम्म-महामात्र
Dhamma-Mahamatra
अशोक द्वारा अपने शासनकाल के तेरहवें वर्ष में धम्म के प्रचार, न्याय सुनिश्चित करने और जनकल्याण को बढ़ावा देने हेतु नियुक्त विशेष अधिकारी वर्ग।Mauryan Period
दीनार
Dinara
गुप्त साम्राज्य में प्रचलित स्वर्ण मुद्रा, जिसका स्वरूप रोमन दिनारियस से प्रेरित था और जो आर्थिक समृद्धि की प्रतीक थी।Gupta Period
द्रोणवाप
Dronavapa
भूमि मापन की परंपरागत इकाई, जो एक द्रोण बीज बोने हेतु आवश्यक भूमि के क्षेत्रफल पर आधारित थी।Gupta & Post-Gupta Bengal
एरि-वारियम
Eri-variyam
चोल स्थानीय प्रशासन में तालाब-सिंचाई जल के रख-रखाव, मरम्मत और वितरण हेतु उत्तरदायी विशेष ग्राम-समिति।Chola Period
गधैया
Gadhaiya
पश्चिमी भारत में उत्तर-गुप्त एवं प्रारंभिक मध्यकाल में प्रचलित घटिया चाँदी-ताँबे के सिक्के, जिनका संबंध गुर्जर-प्रतिहारों से रहा।Early Medieval Period
घटिका
Ghatika
मंदिरों से संबद्ध उच्च शिक्षा एवं वैदिक अध्ययन की संस्था, जो विशेषतः पल्लवों और पश्चिमी चालुक्यों के शासनकाल में प्रमुख रही।Early Medieval South India
गोप
Gopa
मौर्य प्रशासन में ग्राम-स्तरीय राजस्व अधिकारी, जो स्थानिक के अधीन पाँच से दस गाँवों का लेखा-जोखा रखता था।Mauryan Period
ग्रामणी
Gramani
वैदिक एवं परवर्ती-वैदिक युग में ग्राम का मुखिया, जो सैन्य रक्षा, कर वसूली और प्रशासनिक न्याय के लिए उत्तरदायी था।Vedic to Post-Vedic Periods
ग्रामिक
Gramika
मौर्य से गुप्त काल तक ग्राम समुदाय का निर्वाचित अथवा नियुक्त कार्यकारी प्रधान, जो स्थानीय सुरक्षा, विवाद-निपटान और नागरिक प्रशासन का प्रबंध करता था।Mauryan to Gupta Periods
हिरण्य
Hiranya
स्वर्ण अथवा नकद रूप में लिया जाने वाला कर, जो जिंस के रूप में दिए जाने वाले भाग-कर से भिन्न था और कृषकों या शिल्पियों से वसूला जाता था।Gupta & Early Medieval
कदमई
Kadamai
प्रारंभिक मध्यकालीन दक्षिण भारत में भूस्वामियों द्वारा राजा अथवा मंदिर-संस्थाओं को नकद या जिंस के रूप में दिया जाने वाला प्रमुख कृषि भू-राजस्व कर।Chola Period
कर
Kara
संपत्ति अथवा उपज पर समय-समय पर लगाया जाने वाला अतिरिक्त शुल्क या अधिभार, जो नियमित भाग-राजस्व से भिन्न था।Post-Vedic to Gupta Periods
कार्षापण
Karshapana
ईसा पूर्व छठी शताब्दी से समूचे प्राचीन भारत में व्यापारिक लेन-देन हेतु प्रचलित मानक चाँदी अथवा ताँबे की आहत मुद्रा।Mahajanapada to Post-Mauryan
कुडवोलै
Kudavolai
एक गुप्त-मतदान प्रणाली, जिसमें ग्राम-समितियों (वारियम) के सदस्यों को चुनने हेतु ताड़पत्र की पर्चियाँ एक कलश से निकाली जाती थीं—इसका उल्लेख उत्तिरमेरूर अभिलेखों में मिलता है।Chola Period
कुडिमई
Kudimai
तमिल क्षेत्रों में कृषकों द्वारा स्थानीय भूस्वामियों अथवा राजकीय संस्थाओं को दिया जाने वाला किरायेदारी शुल्क या व्यक्तिगत सेवा-दायित्व।Chola & Pandyan Periods
कुल्यवाप
Kulyavapa
बंगाल में प्रचलित भूमि मापन इकाई, जो एक कुल्य (टोकरी भर) बीज बोने हेतु आवश्यक भूखंड को दर्शाती थी।Gupta & Post-Gupta Bengal
कुमारामात्य
Kumaramatya
गुप्त प्रशासनिक सेवा में उच्च पदस्थ नागरिक अधिकारियों और क्षेत्रीय प्रशासकों का प्रतिष्ठित संवर्ग।Gupta Empire
कुप्याध्यक्ष
Kupyadhyaksha
कौटिल्य के अर्थशास्त्र में वर्णित एक अधिकारी, जो वन-उपज (कुप्य) की देखरेख करने वाले राजकीय अधीक्षक (अध्यक्ष) के पद पर नियुक्त होता था — मौर्य प्रशासनिक तंत्र के विभागीय अधीक्षकों की व्यवस्था का एक भाग।Mauryan Empire
मोम-लोप तकनीक (सायर पेर्दु)
Lost-wax Technique
धातु ढलाई की एक विधि, जिसमें मोम के साँचे के माध्यम से पिघली हुई कांस्य प्रतिमा गढ़ी जाती है — हड़प्पाकालीन नृत्य करती बालिका की प्रतिमा इसका प्रसिद्ध उदाहरण है।Harappan to Early Medieval
महादण्डनायक
Mahadandanayaka
गुप्त साम्राज्य के केंद्रीय प्रशासनिक ढाँचे में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अथवा सर्वोच्च सैन्य सेनापति।Gupta Period
महाजी
Mahaji
प्रारंभिक मध्यकालीन उत्तर भारत में क्षेत्रीय न्यायिक परिषदों और कृषि विवाद-प्रबंधन में सहभागी ग्रामीण अभिजन, वृद्धजन अथवा ग्राम-नेता।Early Medieval North India
महामात्र
Mahamatra
मौर्य प्रशासन में नियुक्त उच्च-स्तरीय मंत्रिस्तरीय अधिकारी, जो कार्यकारी, न्यायिक तथा विशिष्ट विभागीय दायित्व संभालते थे।Mauryan Period
महासन्धिविग्रहिक
Mahasandhivigrahika
विदेश मामलों, शांति एवं युद्ध का मंत्री, जो अंतरराष्ट्रीय संबंधों, सैन्य गठबंधनों और शांति-अनुज्ञप्तियों के जारी करने हेतु उत्तरदायी था।Gupta & Post-Gupta Periods
महत्तर
Mahattara
ग्राम के वृद्धजन अथवा सम्मानित सामुदायिक प्रतिनिधि, जो ग्रामीण कार्यकारी परिषदों में स्थानीय कृषि मामलों का प्रबंध करते थे।Gupta & Early Medieval
मण्डल
Mandala
अर्थशास्त्र की कूटनीति में पड़ोसी राज्यों के समूह को दर्शाने वाला सैद्धांतिक ढाँचा, अथवा मध्यकालीन राज्यों में एक क्षेत्रीय प्रशासनिक इकाई।Mauryan / Early Medieval
महापाषाण
Megaliths
मुख्यतः लौह युग में दक्षिण भारत में मृतक-संस्कार अनुष्ठानों हेतु निर्मित विशाल पाषाण संरचनाएँ, समाधि-स्मारक अथवा स्मृति-शिलाखंड।Iron Age / Prehistoric
मेहरगढ़
Mehrgarh
बलूचिस्तान (पाकिस्तान) में एक प्रारंभिक अमृण्मय एवं मृण्मय नवपाषाणकालीन बस्ती, जो लगभग सात हज़ार ईसा पूर्व कृषि एवं पशुपालन के आरंभिक प्रमाण दर्शाती है।Neolithic Period
मेलुहा
Meluhha
सिंधु घाटी/हड़प्पा सभ्यता के लिए प्राचीन मेसोपोटामिया में प्रचलित नाम, जिसका उल्लेख क्यूनिफॉर्म अभिलेखों में मिलता है।Harappan Civilization
लघुपाषाण
Microliths
मध्यपाषाण युग में फलकों पर निर्मित छोटे, ज्यामितीय पाषाण उपकरण (एक से पाँच सेंटीमीटर), जो शिकार, मत्स्यन तथा खुरचने के काम आते थे।Mesolithic Period
मुवेंदर
Muventar
प्राचीन दक्षिण भारत के तीन प्रमुख राजवंशों — चेर, चोल और पांड्य — के तीन मुकुटधारी राजाओं को दर्शाने वाली प्रारंभिक तमिल अवधारणा।Sangam Age
नाडु
Nadu
चोल एवं पांड्य राजवंशों में कई गाँवों (ऊर्) से मिलकर बना मध्यवर्ती क्षेत्रीय प्रशासनिक-कृषि क्षेत्र, जिसका संचालन एक परिषद (नाट्टार) करती थी।Chola & Pandyan Dynasties
नगरम्
Nagaram
दक्षिण भारतीय नगरों में बाज़ार, व्यापार-कर और नगरीय वाणिज्य को नियमित करने वाली नगरीय सभा अथवा व्यापारियों की विशेष संघ-परिषद।Chola & Vijayanagara
नाट्टार
Nattar
एक नाडु क्षेत्र के भूस्वामियों और स्थानीय नेताओं की सभा, जो कर वसूली, भूमि विवाद तथा स्थानीय सुरक्षा हेतु उत्तरदायी थी।Chola & Pandyan Dynasties
निगम
Nigama
व्यापारिक संघ, वणिक समिति अथवा नगर-बाज़ार सभा, जिसे स्थानीय आहत मुद्रा ढालने और व्यापार को नियमित करने का अधिकार प्राप्त था।Post-Mauryan Period
निष्क
Niska
प्रारंभिक वैदिक काल में प्रचलित स्वर्ण आभूषण, हार अथवा मुद्रा-प्रतीक, जो कालांतर में एक मान्यता-प्राप्त सिक्का-माप के रूप में विकसित हुआ।Vedic Period
निवर्तन
Nivartana
सातवाहन एवं वाकाटक शासन में मध्य एवं पश्चिम भारत में प्रचलित भूमि मापन इकाई, जिसकी गणना जुताई-क्षेत्र के आधार पर होती थी।Satavahana & Vakataka
पट्टकील
Pattakila
मध्य एवं पश्चिम भारत के प्रारंभिक मध्यकालीन राज्यों में ग्राम-मुखिया, जो राजस्व वसूली हेतु उत्तरदायी था — परवर्ती पटेल पद का पूर्ववर्ती रूप।Early Medieval Period
पट्टिनी पंथ
Pattini Cult
कण्णगी को आदर्श सती-नारी के रूप में पूजने की अनुष्ठानिक परंपरा, जिसे चेर राजा सेंगुट्टुवन ने स्थापित किया और जिसका वर्णन शिलप्पदिकारम् में मिलता है।Sangam Age / Chera
प्रशास्त्री
Prashastri
प्राचीन भारतीय राज्य-तंत्र में पुलिस, कारागार-प्रशासन और नगरीय विधि-व्यवस्था का प्रमुख अधिकारी।Mauryan & Post-Mauryan
आहत मुद्राएँ
Punch-marked Coins
भारत की प्राचीनतम मुद्रा-प्रणाली, जो चाँदी अथवा ताँबे के टुकड़ों पर सूर्य, वृक्ष, पर्वत जैसे कई प्रतीक अंकित कर बनाई जाती थी, बिना किसी लिखित अभिलेख के।6th Century BCE – 2nd Century BCE
राजुक
Rajuka
मौर्यों द्वारा सृजित उच्च-स्तरीय ग्रामीण राजस्व एवं न्यायिक अधिकारी, जिसे अशोक ने प्रशासनिक न्याय के क्रियान्वयन हेतु विशेष रूप से सशक्त किया।Mauryan Period
रूपदर्शक
Rupadarshaka
अर्थशास्त्र में उल्लिखित एक अधिकारी, जो सिक्कों की जाँच का कार्य करता था — मौर्य मौद्रिक प्रशासन में गुणवत्ता एवं शुद्धता-निरीक्षण का प्रारंभिक उदाहरण।Mauryan Empire
सभा
Sabha
वैदिक काल में वृद्धजनों और कुलीनों की विशिष्ट परिषद; दक्षिण भारत में ब्रह्मदेय ग्रामों में ब्राह्मण भूस्वामियों की एक विशेष सभा भी इसी नाम से जानी जाती थी।Vedic & Early Medieval South
समाहर्ता
Samaharta
मौर्य प्रशासनिक तंत्र में राजस्व का मुख्य संग्राहक-प्रधान, जो भूमि, खान तथा सीमा-शुल्क से प्राप्त आय का नियंत्रण करता था।Mauryan Empire
समिति
Samiti
प्रारंभिक वैदिक काल में संपूर्ण जनजाति अथवा सामान्य नागरिकों की लोक-सभा, जो जनजातीय प्रधान (राजन) पर निर्वाचकीय प्रभाव रखती थी।Early Vedic Period
सन्निधाता
Sannidhata
मौर्य प्रशासनिक व्यवस्था में शाही भंडारगृहों और अन्न-भंडारों का प्रमुख कोषाध्यक्ष एवं मुख्य रक्षक।Mauryan Empire
सार्थवाह
Sarthavaha
स्थलीय व्यापार-मार्गों पर अंतर-क्षेत्रीय व्यापारिक काफिलों का नेतृत्व करने वाला व्यापारी-प्रधान।Post-Mauryan & Gupta
श्रेष्ठी
Shresthi
एक प्रभावशाली नगरीय बैंकर, वित्तपोषक अथवा व्यापारिक श्रेणी का प्रधान, जो स्थानीय साख-व्यवस्था और बाज़ार-निवेश पर अधिकार रखता था।Post-Mauryan & Gupta
श्रेणी
Sreni
शिल्पी-कारीगरों अथवा व्यापारियों का संगठित निगम, जिसे अपने सदस्यों पर न्यायिक, आर्थिक तथा प्रशासनिक स्वायत्तता प्राप्त थी।Post-Vedic to Early Medieval
स्थानिक
Sthanika
मौर्य प्रांतीय व्यवस्था में आठ सौ गाँवों (स्थानीय) के प्रभाग का प्रबंधन करने वाला क्षेत्रीय प्रशासनिक अधिकारी।Mauryan Empire
सुवर्ण
Suvarna
प्राचीन विधि-ग्रंथों में उल्लिखित मानक स्वर्ण मुद्रा-इकाई, जिसका भार अस्सी रक्तिका (रत्ती) के बराबर माना जाता था।Post-Mauryan & Gupta
तनियूर
Taniyur
एक विशाल, स्वशासित, स्वायत्त कृषि-ग्राम अथवा नगर, जो क्षेत्रीय नाडु की प्रशासनिक निगरानी से मुक्त था।Chola Dynasty
उद्रंग
Udranga
प्रारंभिक मध्यकालीन राज्यों में स्थायी अथवा निश्चित किरायेदारों पर लगाया जाने वाला भूमि-कर, जो अस्थायी किरायेदार-अधिभार से भिन्न था।Post-Gupta & Early Medieval
उपरिकर
Uparikara
अनिवासी अथवा अस्थायी किरायेदार कृषकों से वसूला जाने वाला अतिरिक्त कर, भूमि-अधिभार अथवा अस्थायी जब्ती।Post-Gupta & Early Medieval
ऊर्
Ur
तमिल प्रदेश के सामान्य कृषि-ग्रामों में गैर-ब्राह्मण भूस्वामी कृषकों और निवासियों की सामान्य सभा।Early Medieval South India
वलनाडु
Valanadu
कई नाडु से मिलकर बना उच्चतर प्रशासनिक प्रभाग, जिसे चोल शासक राजराज प्रथम ने क्षेत्रीय संगठन को सुव्यवस्थित करने हेतु स्थापित किया।Chola Empire
वारियार
Variyar
कुडवोलै पद्धति द्वारा चुने गए कार्यकारी सदस्य अथवा समिति-अधिकारी, जो दक्षिण भारत में विशेष नगरपालिका उप-समितियों (वारियम) में सेवारत होते थे।Chola Empire
वेलिर
Velir
संगम युग के दक्षिण भारत में भूमि-अधिकृत लघु सरदार अथवा कुलीन वंश, जो क्षेत्रीय गढ़ों के स्वामी थे और कवियों तथा राजाओं को संरक्षण देते थे।Sangam Age
विदथ
Vidatha
ऋग्वेद में उल्लिखित प्राचीनतम जनजातीय लोक-सभा, जो सामुदायिक आर्थिक पुनर्वितरण, धार्मिक अनुष्ठानों और युद्ध-निर्णयों में सहभागी होती थी।Early Vedic Period
विषय
Vishaya
गुप्त एवं प्रारंभिक मध्यकालीन राज्यों में जिला-स्तरीय प्रशासनिक प्रभाग, जिसका शासन विषयपति नामक अधिकारी करता था।Gupta & Early Medieval
विषयपति
Vishayapati
विषय (जिले) का प्रशासक अथवा राज्यपाल, जो स्थानीय व्यापारियों और शिल्पियों की एक सलाहकार परिषद के साथ मिलकर कार्य करता था।Gupta Empire
विष्टि
Vishti
राजकीय अधिकारियों अथवा दानग्रहीताओं द्वारा किसानों, शिल्पियों और निम्न-वर्गीय समूहों से राजकीय कार्यों हेतु बलपूर्वक ली जाने वाली अवैतनिक श्रम-सेवा।Gupta & Early Medieval
युक्त
Yukta
मौर्य अभिलेखों में उल्लिखित एक अधीनस्थ प्रशासनिक अथवा राजस्व अधिकारी, जो स्थानीय लेखा-जोखा की जाँच हेतु राजुकों के साथ कार्य करता था।Mauryan Empire

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