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UGC NET इतिहास यूनिट 9 संपूर्ण अवलोकन नोट्स (हिंदी): भारतीय राष्ट्रवाद का उत्थान
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यूनिट 9 / 10 · आधुनिक भारत। यह यूनिट राष्ट्रवाद के उदय से स्वतंत्रता और स्वतंत्र भारत के आरंभिक वर्षों तक चलती है। प्रश्न कांग्रेस के चरणों व आंदोलनों के क्रम, धाराओं (वामपंथ, दलित, सांप्रदायिक राजनीति) और स्वतंत्रता के बाद के निर्णयों (रियासतें, संविधान, राज्य-पुनर्गठन, नीति) पर आते हैं।
- कैसे पढ़ें: आंदोलनों को समय-रेखा पर रखिए, फिर हर के कारण, नेता व परिणाम; व्याख्या से पहले अभ्यास प्रश्न कीजिए।
- आधिकारिक टॉपिक: सभी 11, सिलेबस के क्रम में।
यह पेज क्या है: हर आधिकारिक टॉपिक के संपूर्ण अवलोकन नोट्स: मुख्य तथ्य, इतिहासकारों की बहसें और परीक्षा में प्रश्न कैसे पूछे जाते हैं, इतने संक्षिप्त कि पूरी यूनिट एक बैठक में दोहराई जा सके। हर टॉपिक के पीछे की पूरी व्याख्या के लिए पूरे आधुनिक भारत नोट्स देखिए।
1. राष्ट्रवाद का सामाजिक व आर्थिक आधार
मूल बात। राष्ट्रवाद को नए शिक्षित वर्ग, साझा आर्थिक शोषण का बोध और संचार के साधन मिले।
- कारण। अंग्रेज़ी-शिक्षित मध्य वर्ग; रेल, डाक व प्रेस से संपर्क; आर्थिक शोषण पर नौरोजी, दत्त व रानाडे का विश्लेषण; इल्बर्ट बिल (1883) जैसे नस्लीय व्यवहार; और सुधार-आंदोलनों से बनी चेतना।
- व्याख्याएं। राष्ट्रवादी मत इसे औपनिवेशिक विरोधाभास का परिणाम मानता है; कैम्ब्रिज स्कूल (अनिल सील) स्वार्थ व गुटबाज़ी का तर्क देता है; मार्क्सवादी (ए.आर. देसाई) इसे वर्ग-हित से जोड़ते हैं; सबाल्टर्न इतिहासकार (रणजीत गुहा) अभिजात-केंद्रित व्याख्याओं की आलोचना करते हैं।
परीक्षा की दृष्टि से: इतिहास-लेखन के स्कूल ↔ मत। फंदा: कोई एक कारण पर्याप्त नहीं; कैम्ब्रिज मत केवल स्वार्थ पर ज़ोर देता है, यह उसकी सीमा है।
2. कांग्रेस का जन्म व विचारधारा 1885–1920: प्रारंभिक, स्वाग्रही राष्ट्रवादी, आंदोलनकारी
मूल बात। कांग्रेस नरमपंथी “प्रार्थना-याचिका” से गरमपंथी “आत्म-निर्भरता” की ओर बढ़ी, और क्रांतिकारी धारा उनसे अलग चली।
- स्थापना। 1885, बंबई; ए.ओ. ह्यूम की भूमिका; पहले अध्यक्ष डब्ल्यू.सी. बनर्जी। “सेफ़्टी वाल्व” सिद्धांत विवादित है और राष्ट्रवादी इतिहासकार उसे अस्वीकार करते हैं।
- नरमपंथी (1885-1905)। नौरोजी, फ़िरोज़शाह मेहता, गोखले, रानाडे, सुरेंद्रनाथ बनर्जी: संवैधानिक तरीक़े, याचिका, विधायी परिषदों का विस्तार, आर्थिक आलोचना।
- गरमपंथी। तिलक, बिपिन चंद्र पाल, लाला लाजपत राय: स्वदेशी, बहिष्कार, राष्ट्रीय शिक्षा, निष्क्रिय प्रतिरोध। 1907 के सूरत अधिवेशन में दोनों का विभाजन हुआ; 1916 के लखनऊ में एकता व कांग्रेस-लीग समझौता हुआ।
- क्रांतिकारी। बंगाल (अनुशीलन, युगांतर), पंजाब, ग़दर आंदोलन (1913), और बाद में एच.आर.ए./एच.एस.आर.ए.।
परीक्षा की दृष्टि से: नेता ↔ धारा; 1907 व 1916 के अधिवेशन। फंदा: गोखले नरमपंथी थे, तिलक गरमपंथी।
3. स्वदेशी व स्वराज
मूल बात। बंगाल-विभाजन ने पहला जन-आंदोलन छेड़ा, और होमरूल ने स्वराज की मांग को आगे बढ़ाया।
- बंग-भंग। कर्ज़न ने 1905 में बंगाल बांटा (16 अक्तूबर); इसके विरोध में स्वदेशी व बहिष्कार आंदोलन, राष्ट्रीय शिक्षा परिषद व स्वदेशी उद्योग उभरे। 1911 में विभाजन रद्द हुआ और राजधानी दिल्ली गई।
- स्वराज। 1906 में दादाभाई नौरोजी की कलकत्ता अध्यक्षता में कांग्रेस ने “स्वराज” को लक्ष्य कहा; तिलक का नारा: “स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है”।
- होमरूल लीग (1916)। तिलक (पुणे, अप्रैल) और एनी बेसेंट (मद्रास, सितंबर)।
परीक्षा की दृष्टि से: विभाजन 1905, रद्द 1911; होमरूल के दो केंद्र। फंदा: स्वदेशी आंदोलन के पहले चरण में लक्ष्य स्वराज (पूर्ण स्वतंत्रता) नहीं, सुधार व बहिष्कार था।
4. गांधीवादी जन आंदोलन; सुभाष बोस व आई.एन.ए.; मध्यम वर्ग व स्त्री भूमिका
मूल बात। गांधी ने सत्य व अहिंसा पर आधारित जन-आंदोलन चलाया, जबकि बोस ने सशस्त्र मार्ग लिया।
| आंदोलन | वर्ष | मुख्य बात |
|---|---|---|
| चंपारण, खेड़ा, अहमदाबाद | 1917-18 | गांधी के आरंभिक स्थानीय सत्याग्रह |
| असहयोग व ख़िलाफ़त | 1920-22 | चौरी चौरा (फ़रवरी 1922) पर वापस |
| सविनय अवज्ञा | 1930-34 | दांडी मार्च (12 मार्च 1930); गांधी-इरविन समझौता (1931) |
| भारत छोड़ो | 1942 | “करो या मरो”; नेताओं की गिरफ़्तारी |
- बोस व आई.एन.ए.। बोस ने कांग्रेस के अध्यक्ष (1938, 1939) पद के बाद फ़ॉरवर्ड ब्लॉक बनाया; रास बिहारी बोस व मोहन सिंह की आई.एन.ए. को 1943 में नेतृत्व दिया; आज़ाद हिंद सरकार। इम्फ़ाल-कोहिमा अभियान विफल रहा; लाल क़िले के मुक़दमों (1945) ने देशव्यापी सहानुभूति जगाई।
- मध्य वर्ग व स्त्रियां। नमक सत्याग्रह में स्त्रियां बड़ी संख्या में सम्मिलित हुईं (कमलादेवी चट्टोपाध्याय, सरोजिनी नायडू); मध्य वर्ग ने वकालत, स्कूल व कॉलेज बहिष्कार जैसे आंदोलन चलाए।
परीक्षा की दृष्टि से: आंदोलन ↔ वर्ष व घटना। फंदा: असहयोग चौरी चौरा पर रुका, दांडी मार्च पर नहीं।
5. वामपंथी राजनीति; दलित वर्ग आंदोलन; सांप्रदायिक राजनीति; मुस्लिम लीग
मूल बात। कांग्रेस के बाहर व भीतर नई धाराएं उठीं, जिनके अलग हित व सोच थे।
- वामपंथ। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (1920 की ताशकंद में एम.एन. रॉय की बैठक या 1925 कानपुर, दोनों पर बहस); मेरठ षड्यंत्र केस (1929); कांग्रेस समाजवादी पार्टी (1934)।
- दलित आंदोलन। फुले, नारायण गुरु, पेरियार का आत्म-सम्मान आंदोलन (1925), अंबेडकर (महाड़ सत्याग्रह 1927, कालाराम मंदिर 1930)। सांप्रदायिक पंचाट (1932) पर गांधी का उपवास व पूना समझौता।
- सांप्रदायिक राजनीति। मुस्लिम लीग (1906); 1909 के पृथक निर्वाचक मंडल; हिंदू महासभा (1915); जिन्ना के चौदह सूत्र (1929); 1940 का लाहौर प्रस्ताव। इतिहासकार इसे सांप्रदायिकता के औपनिवेशिक उदय या सामाजिक-आर्थिक प्रतिद्वंद्विता से समझाते हैं।
परीक्षा की दृष्टि से: आंदोलन ↔ नेता। फंदा: पूना समझौता (1932) अंबेडकर व गांधी के बीच हुआ, और उसने पृथक निर्वाचक मंडल की जगह आरक्षित सीटें दीं।
6. स्वतंत्रता व विभाजन की ओर
मूल बात। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद वार्ताएं, हिंसा व योजनाएं बंटवारे की ओर बढ़ीं।
- प्रस्ताव। अगस्त प्रस्ताव (1940), क्रिप्स मिशन (1942), वेवेल योजना व शिमला सम्मेलन (1945), कैबिनेट मिशन (1946), प्रत्यक्ष कार्रवाई दिवस (16 अगस्त 1946), अंतरिम सरकार, और माउंटबेटन योजना (3 जून 1947)।
- स्वतंत्रता। भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947; 14-15 अगस्त को दो डोमिनियन; सीमा-निर्धारण (रैडक्लिफ़)। विस्थापन लगभग एक से डेढ़ करोड़ लोगों का हुआ और हिंसा बहुत हुई।
- बहस। उत्तरदायित्व पर मत भिन्न हैं: जिन्ना की मांग, कांग्रेस की भूमिका, ब्रिटिश “बांटो-राज करो” नीति, और जल्दबाज़ी।
परीक्षा की दृष्टि से: घटनाओं का सही कालक्रम: क्रिप्स (1942), वेवेल/शिमला (1945), प्रत्यक्ष कार्रवाई दिवस (1946), माउंटबेटन (1947)। फंदा: कैबिनेट मिशन (1946) शिमला सम्मेलन (1945) के बाद आया।
7. स्वतंत्रता पश्चात्: रियासतों का एकीकरण — कश्मीर, हैदराबाद, जूनागढ़
मूल बात। लगभग 560 रियासतों में से अधिकतर शीघ्र मिल गईं, पर तीन कठिन मामले रहे।
- प्रक्रिया। सरदार पटेल व वी.पी. मेनन; विलय-पत्र (रक्षा, विदेश, संचार); फिर रियासतों का विलयन व संघों का गठन।
- जूनागढ़। नवाब पाकिस्तान में गया, पर जनता नहीं; फ़रवरी 1948 के जनमत संग्रह में भारी बहुमत भारत के पक्ष में रहा।
- हैदराबाद। निज़ाम ने स्वतंत्रता चाही; ठहराव समझौता (1947); रज़ाकारों की हिंसा के बाद सितंबर 1948 की सैन्य कार्रवाई (“ऑपरेशन पोलो”)।
- कश्मीर। महाराजा हरि सिंह; पाकिस्तान-समर्थित कबायली आक्रमण (अक्तूबर 1947); विलय-पत्र पर हस्ताक्षर; भारतीय सेना; मामला संयुक्त राष्ट्र में गया और युद्धविराम 1949 में हुआ।
परीक्षा की दृष्टि से: रियासत ↔ घटना व वर्ष। फंदा: जूनागढ़ में जनमत संग्रह हुआ, हैदराबाद में सैन्य कार्रवाई।
8. अंबेडकर व संविधान; नौकरशाही; नई शिक्षा नीति
मूल बात। संविधान सभा ने तीन वर्ष में ऐसा संविधान बनाया जिसने उपनिवेशी ढांचे के अनेक तत्व व नए अधिकार जोड़े।
- संविधान। संविधान सभा की पहली बैठक दिसंबर 1946; अंबेडकर प्रारूप समिति के अध्यक्ष; 26 नवंबर 1949 को अपनाया, 26 जनवरी 1950 से लागू। मूल अधिकार, नीति-निदेशक सिद्धांत, संघीय पर मज़बूत केंद्र वाली व्यवस्था।
- नौकरशाही। आई.सी.एस. की विरासत में अखिल भारतीय सेवाएं (आई.ए.एस.), जिन्हें पटेल ने “इस्पात का ढांचा” बनाए रखना चाहा।
- शिक्षा। राधाकृष्णन आयोग (1948-49), माध्यमिक शिक्षा आयोग (1952), कोठारी आयोग (1964-66), राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1968, 1986 व 2020।
परीक्षा की दृष्टि से: आयोग ↔ वर्ष; संविधान की प्रमुख तिथियां। फंदा: संविधान अपनाने की तिथि (26 नवंबर 1949) लागू होने की तिथि (26 जनवरी 1950) से अलग है।
9. आर्थिक नीतियां व नियोजन; विकास, विस्थापन, जनजातीय मुद्दे
मूल बात। भारत ने राज्य-नेतृत्व वाला मिश्रित अर्थतंत्र चुना, जिसके लाभ के साथ विस्थापन जैसी क़ीमतें भी थीं।
- नियोजन। योजना आयोग (1950); पहली योजना (1951-56, कृषि); दूसरी (1956-61, महालनोबिस मॉडल, भारी उद्योग); 1956 का औद्योगिक नीति प्रस्ताव; सार्वजनिक क्षेत्र।
- कृषि। भूमि-सुधार (ज़मींदारी उन्मूलन), सामुदायिक विकास, 1960 के दशक के मध्य से हरित क्रांति।
- विकास की क़ीमत। बड़े बांधों (भाखड़ा, हीराकुंड, बाद में नर्मदा) व खनन से विस्थापन, जिसमें आदिवासी असमान रूप से प्रभावित हुए; संविधान की पांचवीं व छठी अनुसूचियां व बाद के वन-अधिकार क़ानून इसी का उत्तर हैं।
परीक्षा की दृष्टि से: योजना ↔ ज़ोर (पहली: कृषि; दूसरी: भारी उद्योग)। फंदा: महालनोबिस मॉडल दूसरी योजना का है।
10. राज्यों का भाषाई पुनर्गठन; केंद्र-राज्य संबंध
मूल बात। भाषा-आधारित मांगों ने राज्यों की सीमाएं बदलीं, और भाषा के आधार पर बने राज्यों से भारत नहीं बंटा, जैसा आरंभ में आशंका थी।
- आंदोलन। पोट्टी श्रीरामुलु के आमरण अनशन (1952-53) के बाद आंध्र बना (1953, पहला भाषाई राज्य); इससे पहले धर आयोग (1948) और जे.वी.पी. समिति (1948-49) ने भाषा के आधार पर राज्य बनाने पर आशंका जताई थी।
- राज्य पुनर्गठन आयोग (फ़ज़ल अली, 1953-55); राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956; 1960 में बंबई का महाराष्ट्र व गुजरात में विभाजन; 1966 में पंजाब व हरियाणा।
- केंद्र-राज्य। राजमन्नार समिति (1969), सरकारिया आयोग (1983-88), पुंछी आयोग (2007-10); अनुच्छेद 356 के दुरुपयोग पर बहस।
परीक्षा की दृष्टि से: आंध्र 1953; आयोग व वर्ष। फंदा: राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 का है; आंध्र उससे पहले बना।
11. विदेश नीति: पंचशील; आपातकाल; उदारीकरण व वैश्वीकरण
मूल बात। नेहरू का गुटनिरपेक्ष आदर्श, आपातकाल का राजनीतिक झटका और 1991 के आर्थिक सुधार तीन निर्णायक मोड़ हैं।
- विदेश नीति। गुटनिरपेक्षता; पंचशील (1954, भारत-चीन संधि); बांडुंग सम्मेलन (1955); 1962 का चीन युद्ध; 1971 में बांग्लादेश; 1974 का परमाणु परीक्षण।
- आपातकाल (1975-77)। 25 जून 1975 को अनुच्छेद 352 के अंतर्गत; प्रेस पर पाबंदी, गिरफ़्तारियां, 42वां संशोधन; 1977 में जनता पार्टी की जीत।
- उदारीकरण (1991)। भुगतान-संतुलन संकट के बाद नरसिंह राव व मनमोहन सिंह की नई आर्थिक नीति: लाइसेंस-राज की समाप्ति, विदेशी निवेश, निजीकरण, वैश्वीकरण। उसके बाद विकास तेज़ हुआ, पर असमानता व क्षेत्रीय भेद पर बहस बनी रही।
परीक्षा की दृष्टि से: घटना ↔ वर्ष (पंचशील 1954, आपातकाल 1975, सुधार 1991)। फंदा: आपातकाल अनुच्छेद 352 (आंतरिक अशांति) के अंतर्गत लगा, 356 के नहीं।
दोहराने की सूची
- मैं कांग्रेस के तीन चरण, उनके नेता व 1907, 1916 के अधिवेशन बता सकता/सकती हूँ।
- मैं गांधी के चार आंदोलन क्रम से और हर के कारण-परिणाम बता सकता/सकती हूँ।
- मैं 1942 से 1947 की योजनाओं का सही क्रम लिख सकता/सकती हूँ।
- मैं तीन कठिन रियासतों का भारत में विलय कैसे हुआ, यह बता सकता/सकती हूँ।
- मैं योजनाओं, आयोगों व नीतिगत मोड़ों को उनके वर्ष से मिला सकता/सकती हूँ।
आगे: यूनिट 9 के आधिकारिक टॉपिक · मुफ़्त यूनिट टेस्ट · यूनिट 10 के संपूर्ण अवलोकन नोट्स।
पूरे पाठ्यक्रम में यही स्पष्टता चाहिए?
इस गाइड ने एक तुलना गहराई से कवर की। हमारे आधुनिक भारत नोट्स, एक असली हिस्ट्री जेआरएफ द्वारा लिखे गए, पूरा सेक्शन इसी तरह कवर करते हैं — जुड़ा हुआ, परीक्षा-केंद्रित, पीवाईक्यू-टैग्ड — ताकि परीक्षा की रात आपको अकेले कड़ियाँ न जोड़नी पड़ें।
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